दंगा भड़का कर पतली गली से निकला बाबा, ग्रामीणों में दहशत
ग्रामीणों, पंचायत व पीरों के फैसला ना मंजूर कर भड़काया दंगा,
दंगा भड़का कर पतली गली से निकला बाबा, ग्रामीणों में दहशत
लोगों को अध्यात्मिक ज्ञान के साथ साथ शांति व भाईचारे का पाठ पढ़ाने वाले बाबा ने गांव कोथ कलां व डेरे की छवि को कलंकित करने का काम किया है। क्योंकि बाबा की गद्दी की चाहत से गांव कोथ कलां व कोथ खुर्द के ग्रामीण दो पक्षों में बंट गए और बुधवार को बाबा की करतुतों से दंगा इतना भड़का की बृहस्पतिवार को गांव की गलियां तो सुनसान दिखाई दी साथ ही डेरे में भी एका दुका ही श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचा। क्योंकि दंगें के बाद गांव व डेरे को पुलिस छावनी में तब्दील किया हुआ है। दंगें के बाद ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ है।
पिछले काफी समय से डेरों के बाबा विवादों में रहे हैं। करीब सात महीने पहले सिरसा डेरे के बाबा की वजह से प्रदेश में हिंसा भड़की थी। जिसका डर आज तक भी लोगों के दिलो दिमाग में बैठा हुआ है और डेरों के नाम से लोगों का विश्वास उठने लगा है। गांव कोथ कलां के दादा कालापीर की कई पीढिय़ों से लोगों की आस्था रही है और यहां के डेरा प्रमुख को लोग पीर की उपाधि देते हैं। डेरे के पूर्व पीर नंदाईनाथ का स्वर्गवास होने के बाद कोथ कलां व कोथ खुर्द के ग्रामीणों ने महंत पीर शुक्राईनाथ को सर्वसमिति से गद्दी पर बैठा दिया था। लेकिन कुछ समय के बाद डेरे की गद्दी पर डेरे के ही साधु भजनाईनाथ कब्जा करके बैठ गए थे और कुछ ग्रामीण उनके समर्थन में खड़े हो गए थे। इस विवाद को सुलझाने के लिए गांव में कई बार पंचायतें भी हुई और सातों पीरों के बार बार महंत शुक्राईनाथ को डेरा प्रमुख बनाने के फैसला देने के बाद भी बाबा भजनाईनाथ ने गद्दी से कब्जा नहीं छोड़ा। लेकिन बुधवार की शाम को हुए दंगें के बाद बाबा भजनाईनाथ ने गांव के युवाओं का भविष्य व डेरे की मर्यादा पर दंगें का दाग लगाकर पतली गली से रफु चक्कर हो गए । जिसके बाद से डेरे की मुख्य गद्दी खाली पड़ी हुई है ओर पुलिस बाबा भजनाईनाथ को पकडऩे के लिए दिन रात एक किए हुए है। वहीं दंगें के बाद गांव के युवा पुलिस के डर से गायब है कि कहीं उनका नाम इस दंगें से न जुड़ जाए। इसलिए गांव की गलियां दिन भर सुनसान दिखाई दी। जबकि डेरे में कुछ ही श्रद्धालु माथा टेकने के लिए पहुंचे।
बॉक्स
दंगें के बाद डेरे के चारों तरफ चार डीएसपियों के नेतृत्व में भारी पुलिस बल को तैनात कर डेरे को पुलिस छावनी में तब्दील किया हुआ है। इसके लिए डेरे के गेट पर भी करीबन आधा दर्जन पुलिस कर्मियों को नियुक्त किया गया है।
बॉक्स
महंत पीर शुक्राईनाथ ने ग्रामीणों ने अपील करते हुए कहा कि दादाकालापीर की आस्था को ठेस ना पहुंचे इसलिए सभी ग्रामीण शांति व भाईचारे का माहौल बनाने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करें। इस मामले में नशा करने वाले बाहरी लोगों ने दंगा कर गांव को बदनाम करने की साजिश करके गांव के माहौल को खराब करने की नाकाम कौशिश की है। सभी ग्रामीण उसके परिवार का हिस्सा हैं।

Comments
Post a Comment